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प्रकट हुए बाल कृष्ण, मथुरा से लेकर द्वारकाधीश तक कान्हा ही कान्हा

भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य हो चुका है. देश भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में लीन है. मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान के भागवत भवन मंदिर में सोमवार रात को 12 बजते ही हरिचंद्रिका पोशाक पहने राधाकृष्ण की छवि के आगे पर्दा खिंच गया और मंदिर परिसर कान्हा के जयकारों से गूंज उठा. मंदिर में करीब आधा घंटे से भी अधिक समय तक मंत्रोच्चारण के मध्य दूध, दही, घी, बूरा, शहद और अनेक औषधियों से ठाकुर जी का महाभिषेक किया गया. इसके बाद ठाकुर जी की मंगला आरती संपन्न हुई.

इससे पहले, श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सुबह-सुबह भक्तों की भीड़ उमड़ी और दिन चढ़ने के साथ ही वृंदावन में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. वृंदावन में दिन में तीन मंदिरों में उत्सव मनाया गया. श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा, “जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में शहनाई पर मधुर धुन बजने के साथ ही भक्तों ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान के प्रांगण में नृत्य किया.” मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी राकेश तिवारी ने बताया कि द्वारकाधीश मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालु देवता के अभिषेक में शामिल हुए.

राधा रमन मंदिर में ‘अभिषेक’ तीन घंटे से अधिक समय तक चला तथा पुजारियों पद्मनाभ गोस्वामी, श्रीवत्स गोस्वामी, दिनेश चंद्र गोस्वामी और ओम गोस्वामी ने संयुक्त रूप से अनुष्ठान किया. दिनेश चंद्र गोस्वामी ने बताया कि कुल 27 क्विंटल दही, दूध, शहद, खांडसारी, घी और जड़ी-बूटियों के लेप से श्रीकृष्ण का अभिषेक किया गया. अभिषेक समारोह के बाद, वृंदावन के निवासियों और विभिन्न स्थानों से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच चरणामृत वितरित किया गया. राधा दामोदर मंदिर में अभिषेक के दौरान हल्दी और दही के मिश्रण से होली खेली गई.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर ने बताया कि नंदगांव, गोवर्धन, बलदेव, जातिपुरा, बरसाना, वृंदावन और मथुरा के अन्य मंदिरों में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई गई और इस दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है. मंगलवार सुबह श्रीकृष्ण जन्मस्थान सहित ब्रज के सभी मंदिरों में नन्दोत्सव की धूम रहेगी. श्रद्धालुओं के आकर्षण का विशेष केंद्र गोकुल का मंदिर होगा, जहां नन्दोत्सव का विशेष आयोजन किया जाएगा.

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