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BRICS Meeting: NSA अजित डोभाल की अध्यक्षता में हुई बैठक, भारत ने उठाया अफगान संकट और सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा

ब्रिक्स एनएसए वर्चुअल मीट पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जिम्मेदार उच्च प्रतिनिधियों की बैठकें ब्रिक्स देशों के बीच राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरी है. उन्होंने बताया कि आज की बैठक में अफगानिस्तान, ईरान, पश्चिम एशिया और खाड़ी में वर्तमान विकास और साइबर सुरक्षा जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उभरते खतरों के संदर्भ में क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा की गई. एनएसए अजित डोभाल ने BRICS देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक की आज अध्‍यक्षता की.

विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने बैठक के दौरान सीमा पार आतंकवाद और लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों की गतिविधियों का मुद्दा उठाया, जिन्हें राज्य का समर्थन प्राप्त है और शांति और सुरक्षा को खतरा है. वहीं, उच्च प्रतिनिधियों ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन द्वारा विचार के लिए ब्रिक्स काउंटर टेररिज्म एक्शन प्लान को अपनाया और इसे लकेर सिफारिश की. कार्य योजना का उद्देश्य आतंकवाद के वित्तपोषण और मुकाबला जैसे क्षेत्रों में सहयोग के मौजूदा तंत्र को और मजबूत करना है.

संयुक्त प्रयासों को मजबूत करने पर बनी सहमति

वहीं, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में, सूचनाओं के आदान-प्रदान और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान, साइबर अपराधों का मुकाबला करने और क्षमता निर्माण द्वारा सहयोग बढ़ाने के संयुक्त प्रयासों को मजबूत करने पर सहमति हुई. भारत ने इससे पहले अगस्त 2021 में डिजिटल फोरेंसिक पर ब्रिक्स कार्यशाला की मेजबानी की थी.

तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा करने के एक हफ्ते बाद यह बैठक हुई. ब्रिक्स (ब्राजील-रूस-भारत-चीन-दक्षिण अफ्रीका) दुनिया के पांच सबसे बड़े विकासशील देशों को एक साथ लाता है, जो वैश्विक आबादी का 41 फीसदी, वैश्विक जीडीपी का 24 फीसदी और वैश्विक व्यापार का 16 फीसदी प्रतिनिधित्व करता है.

बैठक में कौन-कौन थे शामिल?

बैठक में रूसी एनएसए जनरल पेत्रुशेव, चीनी पोलित ब्यूरो के सदस्य यांग जेइची, ब्राजील के सुरक्षा अधिकारी जनरल ऑगस्टो हेलेना रिबेरो परेरा और दक्षिण अफ्रीका के उप राज्य सुरक्षा मंत्री नसेडिसो गुडएनफ कोडवा ने भाग लिया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ से निपटने में ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच गहरे सहयोग के लिए दृढ़ता से जोर देता रहा है.

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