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‘दोस्ती का हाथ बड़ा रहा तालिबान’, मामले पर भारत ने कही अब बड़ी बात, पढ़ें- अफगानिस्तान संकट पर क्या है केंद्र का रुख

विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला (Foreign Secretary Harsh Vardhan Shringla) ने तालिबान पर अमेरिका और भारत का रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका सभी चीजें बहुत ध्यान से देख रहा है. वह देख रहे हैं कि चीजें कैसे आकार ले रही हैं. विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने शुक्रवार को कहा कि भारत और अमेरिका अफगानिस्तान में पाकिस्तान की गतिविधियों पर भी करीब से नजर रखे हुए हैं.

विदेश सचिव ने कहा कि तालिबान के साथ भारत के सीमित जुड़ाव में नए अफगान शासकों ने संकेत दिया है कि वे नई दिल्ली की चिंताओं को दूर करने में उचित होंगे. वाशिंगटन डीसी की अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा के अंत में उन्होंने भारतीय पत्रकारों के एक ग्रुप से कहा कि जाहिर है, हमारी तरह, वे (अमेरिका) भी ध्यान से देख रहे हैं और हमें पाकिस्तान की हरकतों को अच्छी तरह से देखना होगा. अफगानिस्तान में स्थिति कैसे विकसित होती है इसके लिए इंतजार करने की जरूरत है.

आतंकवाद नहीं चाहता है भारत

विदेश सचिव ने बताया कि भारत के बयान में तालिबान से कहा गया है कि उन्हें इस बात का ध्या रखना होगा कि कोई भी आतंकवाद नहीं होना चाहिए, जो हमारे या अन्य देशों के खिलाफ निर्देशित उनके क्षेत्र से उत्पन्न हो. हम चाहते हैं कि वे महिलाओं, अल्पसंख्यकों आदि की स्थिति के प्रति सचेत रहें. शीर्ष भारतीय राजनयिक अपने अमेरिकी समकक्ष और बिडेन प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ उद्योग जगत और थिंक-टैंक के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के अलावा कई बैठकों के लिए वाशिंगटन डीसी में थे.

‘पाकिस्तान ने दिया तालिबान का साथ’

इससे पहले विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से भी मुलाकात की थी. यह देखते हुए कि अफगानिस्तान में स्थिति बहुत तरल है और तेजी से आगे बढ़ रही है, श्रृंगला ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों इस पर कड़ी नजर रख रहे हैं. पाकिस्तान अफगानिस्तान का पड़ोसी देश है. उन्होंने तालिबान का समर्थन और पोषण किया है. वहां कई ऐसे तत्व हैं जिनका पाकिस्तान समर्थन करता है.

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