उत्तर प्रदेशकानपुर

हाई कोर्ट के आदेश के बाद कानपुर का Z स्कॉवयर मॉल खोला गया, ऐसे बनी बात

कानपुर के सबसे बड़े मॉल जेड स्क्वायर मॉल (Z Sqare Mall) को टैक्स न चुकाए जाने के चलते सील (Seal) कर दिया गया था. लेकिन हाईकोर्ट (HighCourt) के दखल के बाद इसकी सील खोल दी गई है. बुधवार को सुबह-सुबह ही नगर निगम अधिकारी जेड स्क्वायर मॉल बड़ा चौराहा पहुंचे थे और करीब 26 करोड़ (26 Crore) का कर बकाया होने के चलते मॉल के 6 गेटों को बंद करते हुए इसे सील कर दिया था. लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद मॉल में लगी सील हटा दी गई है. नगर निगम (Kanpur Nagar Nigam) ने मॉल पर कार्यवाही इसलिए की थी, क्योंकि करीब 26 करोड़ का गृह कर, जलकर और सीवर कर शहर के इस सबसे बड़े जेड स्क्वायर मॉल पर बकाया है.

बुधवार को किया था सील

जब कई बार रिमाइंडर देने के बावजूद मॉल प्रबंधन ने नगर निगम का बकाया कर नहीं जमा किया तो बुधवार सुबह मौके पर पहुंचकर बड़े अधिकारियों ने मॉल को सील कर दिया. इससे पहले भी 1 जनवरी 2021 को नगर निगम ने मॉल को सील किया था, तब महापौर प्रमिला पांडे ने खुद मॉल पर ताला जड़वाया था. लेकिन मॉल प्रबंधन ने उसी दिन एक करोड़ रुपए का चेक नगर निगम को सौंप दिया था.

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद मिली राहत

दरअसल, हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने आदेश दिया है कि, मॉल प्रबंधन फिलहाल 53 लाख रुपए का भुगतान 15 दिनों के भीतर करेगा. पुराने हाउस टैक्स को लेकर नगर निगम 15 दिन में इस मामले की सुनवाई करेगा. इससे पहले बुधवार की सुबह 8 बजे से नगर निगम के अपर नगर आयुक्त अरविंद राय और रोली गुप्ता के नेतृत्व में मॉल के 6 नंबर गेट को छोड़कर सभी गेट पर ताले लगा दिए गए थे. बताया गया था कि, नगर निगम और जलकल का मॉल पर करीब 26 करोड़ टैक्स बकाया है जो कई वर्षों से नहीं चुकाया गया.

कोर्ट में दोनों पक्षों में हुई जिरह 

इस मामले में मॉल की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता शशि उदयन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जिस पर 2 सदस्य बेंच ने सुनवाई की. नगर निगम की तरफ से अधिवक्ता अभिनव कृष्णा ने जिरह की. मॉल की तरफ से कहा गया कि, 26 दिसंबर 2014 को संपत्ति का वार्षिक मूल्यांकन तीन करोड़ 53 लाख रुपए के करीब लगाया गया था. इसके खिलाफ वर्ष 2016 में चुनौती दी गई जो अभी हाई कोर्ट में लंबित है. 15 जून 2021 को मौजूदा बकाया भुगतान को लेकर डेढ़ करोड़ रुपए का वर्तमान बिल दिया गया. 10 करोड़ 44 लाख के करीब रुपए मिलाकर 14.5 करोड़ का बकाया दर्शाया गया, जिसमें ब्याज भी शामिल है. याचिकाकर्ता ने कहा कि 26 दिसंबर 2014 को जो डिमांड की गई थी वह न्याय पूर्ण नहीं है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button