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आगरा में बढ़ती जा रही है बुखार की बीमारी, डॉक्टरों का कहना- मरीजों के देरी से अस्पताल पहुंचने से बढ़ रहा है मौतों का आंकड़ा

उत्तर प्रदेश के आगरा में बच्चों और बड़े लोगों के बीच बुखार की बीमारी  बढ़ती ही जा रही है. आगरा के एस एन मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल डॉ प्रशांत गुप्ता ने टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में बताया कि बुखार से होने वाली मौत के पीछे बड़ी वजह देरी से मरीज का अस्पताल पहुंचना है. हैरानी की बात है कि बच्चो का चार-पांच दिन में भी बुखार नहीं टूट रहा है. इसी के साथ बच्चे उल्टी भी कर रहे हैं. इन सबके बीच केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम भी आगरा पहुंच चुकी है और लखनऊ से भी डॉक्टरों की टीम को विशेष तौर पर बुलाया गया है.

आगरा के एस एन मेडिकल कॉलेज में लगभग पच्चीस मरीज एडमिट हैं. इसके अतिरिक्त आगरा के सभी अस्पतालों को एक खास तरह का फार्म दिया गया है जिसमें डेंगू और बुखार संबंधित बीमारी के लिए डेटा संग्रहित करने को कहा गया है.

डॉ प्रशांत ने बताया कि डेंगू की अपनी स्टेज होती है. समयानुसार बच्चे का इलाज नहीं मिले तो बीमारी विकराल रूप ले लेती है. अधिककर मरीज ग्रामीण परिवेश से आ रहे हैं. यह तब अस्पताल पहुंच रहे हैं जब बीमारी आखिरी चरण में होती है.

क्रिटिकल केयर को लेकर टीम

लखनऊ से विशेष डॉक्टरों की भी टीम अस्पताल आई है. इस टीम में खासकर क्रिटिकल केयर के डॉक्टर आए हैं जिन्होंने खास तरह के कुछ सुझाव दिए हैं. परेशानी इस बात की है कि मरीज आखिरी समय में अस्पताल आ रहे हैं. ऐसे में इन क्रिटिकल मरीजों का कैसै इलाज किया जाए इसे लेकर खास सुझाव दिए गए हैं.

अस्पतालों में क्या है विशेष तैयारी

इस बीमारी से बचने के लिए अस्पतालों में विशेष तैयारी की गयी है. जिनमें मेडिसिन वार्ड में बिस्तरों की संख्या बढ़ायी जा रही है. पहले से ही मेडीसिन के दो वार्ड तैयार किए जा चुके हैं ऐसे में इन वार्ड के साथ-साथ आईसीयू वार्ड को भी डेवल किया जा रहा है. इसके साथ ही पेडियाट्रिक वार्डों को संख्या को भी बढ़ाया गया है. बता दें कि अस्पताल की ओपीडी में बीते सप्ताह से औसतन 143 से 150 बच्चे आ रहे हैं. इनमें से 90 से 110 बच्चों को बुखार-खांसी है. ज्यादातर परिजन बच्चे के बुखार आने के एक-दो दिन बाद ओपीडी में दिखाने ला रहे हैं.

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