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युवाओं ने भाजपा की छात्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज़ बुलंद की

लखनऊ। संविधान समान अधिकार, सम्मान और अवसर की गारंटी देता है,लेकिन केन्द्र सरकार के यूजीसी अमेंडमेंट ने युवाओं और छात्रों को आक्रोशित कर दिया है। इसके साथ ही प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी और संत समाज के अपमान की घटना ने भाजपा की नीयत उजागर कर दी है। इसी के विरोध में युवा कांग्रेस ने राजधानी लखनऊ में भाजपा प्रदेश कार्यालय का घेराव किया।

उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कार्यकारी श्री अंकित तिवारी के नेतृत्व में युवाओं ने भाजपा की छात्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज़ बुलंद की।

इस विरोध के दौरान भाजपा प्रदेश कार्यालय के सामने युवा कांग्रेस के पदाधिकारियो और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई, लेकिन युवा कांग्रेस का हौसला नहीं टूटा, युवा कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन संविधान की मर्यादा में, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है।

यूजीसी का नया अधिनियम छात्रों की पढ़ाई और भविष्य के लिए घातक है। इसके साथ ही प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी और संत समाज के अपमान की घटना ने भाजपा की नीयत उजागर कर दी है।

प्रदेश अध्यक्ष अंकित तिवारी जी ने कहा कि यह आवाज है उन अन्यायपूर्ण नीतियों के विरुद्ध, जो समाज में असंतुलन और भेदभाव बढा रही हैं। यूजीसी के काले अधिनियमों के विरोध में हम संविधान की मर्यादा में रहकर, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं लेकिन सरकार आवाज दबाने में लगी हुई है।

उन्होने युवाओं और छात्रों का आवाहन किया कि अब समय है जागरूक होने का, एकजुट होकर अपनी आवाज को संविधानिक और सकारात्मक रूप में उठायें। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार के यूजीसी का जो नया अधिनियम लाया जा रहा है उससे छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर असर पड़ रहा है।

श्री तिवारी ने कहा कि आज देश में धर्मगुरूओं का भी अपमान करने में भाजपा जुटी हुई है। सरकार के इशारे पर जिस प्रकार शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्रानंद जी और उनके साथ उनके शिष्यों के साथ प्रयागराज में जो घटना हुई है उससे यह साबित हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी धर्म और आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है।

उन्होने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी से शंकराचार्य होने का सबूत मांगना गलत तो है ही संतों का अपमान है। सरकार के इशारे पर जिस प्रकार प्रशासन ने अपनी मर्यादा, अधिकार लांघे बहुत ही निन्दनीय है।

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