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‘प्रगति’ पोर्टल से सुशासन को मिली नई गति, 97 फीसद मामलों का हुआ समाधान: CM योगी

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रगति पोर्टल को उत्तर प्रदेश में सुशासन का मजबूत आधार बताते हुए कहा कि यह प्लेटफॉर्म परियोजनाओं, योजनाओं और जन-शिकायतों की त्वरित समीक्षा एवं समाधान में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुआ है। उन्होंने कहा कि ‘प्रगति’ सहकारी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख शासन व्यवस्था का सशक्त उदाहरण है।

राजधानी लखनऊ में मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के गठन के बाद देश और प्रदेश में दूरदर्शी नीतियों के सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। वर्ष 2003 में गुजरात में विकसित ‘स्वागत’ पोर्टल की सफलता के आधार पर ही ‘प्रगति’ को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया, जो आज सिस्टम रिफॉर्म्स का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। योगी ने कहा ” प्रगति ने “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस” की सोच को व्यवहार में उतारने का कार्य किया है। इससे शासन में जिम्मेदारी और जवाबदेही स्पष्ट हुई है। ”

उन्होंने बताया कि देशभर की 377 प्रमुख परियोजनाओं की सीधे प्रधानमंत्री द्वारा समीक्षा की जा रही है, जिससे आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लिए प्रगति पोर्टल एक गेम चेंजर के रूप में सामने आया है। प्रदेश में लगभग 4 लाख 65 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं इससे जुड़ी हैं। इनमें कई परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि अनेक पर कार्य तेजी से जारी है। विभिन्न विभागों के सामूहिक प्रयास और समन्वय से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

उन्होंने बताया कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में 97 प्रतिशत मामलों का समाधान सुनिश्चित किया गया है। इश्यू रेजोल्यूशन की यह प्रक्रिया सुशासन का एक प्रभावी मॉडल बन चुकी है, जिससे जन-शिकायतों और विकास से जुड़ी समस्याओं के समाधान में तेजी आई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति जैसे प्लेटफॉर्म ने उत्तर प्रदेश को “बॉटलनेक” से “ब्रेकथ्रू” की ओर ले जाने का काम किया है। यह नए भारत की नई सोच का प्रतीक है, जहां समस्याओं को चिन्हित कर समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।

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